- यह पूरी तरह मिथक है। मस्तिष्क-स्कैन दिखाते हैं कि दिन भर में, यहाँ तक कि नींद में भी, मस्तिष्क के लगभग सभी हिस्से किसी न किसी समय सक्रिय होते हैं। मस्तिष्क शरीर की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा खर्च करता है—प्रकृति 90% निष्क्रिय अंग नहीं पालती।
- यह विचार कि तार्किक लोग 'बाएँ-दिमाग़' और रचनात्मक लोग 'दाएँ-दिमाग़' वाले होते हैं, एक अति-सरलीकरण है। यह सच है कि कुछ कार्य एक गोलार्ध में अधिक केंद्रित होते हैं, पर लगभग हर जटिल कार्य में दोनों गोलार्ध मिलकर काम करते हैं। किसी का समग्र व्यक्तित्व एक तरफ़ के दिमाग़ से तय नहीं होता।
- यह लोकप्रिय मान्यता कि कुछ लोग 'दृश्य' और कुछ 'श्रवण' शिक्षार्थी होते हैं, और उसी अनुसार पढ़ाने से वे बेहतर सीखते हैं—प्रयोगों में टिकती नहीं। शोध बताते हैं कि सामग्री की प्रकृति के अनुसार उपयुक्त तरीक़ा चुनना, व्यक्ति की कथित 'शैली' से कहीं अधिक मायने रखता है। हर किसी को सक्रिय और विविध तरीक़ों से लाभ होता है।
- तथाकथित 'मोज़ार्ट प्रभाव'—यानी संगीत सुनने मात्र से बुद्धि बढ़ना—को मूल अध्ययन से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और बाद में यह विश्वसनीय रूप से दोहराया नहीं जा सका। संगीत सीखना और अभ्यास करना ज़रूर लाभकारी हो सकता है, पर सिर्फ़ पृष्ठभूमि में संगीत बजाना IQ नहीं बढ़ाता। यह एक आकर्षक पर भ्रामक दावा है।
क्या हम मस्तिष्क का केवल 10% उपयोग करते हैं?
यह पूरी तरह मिथक है। मस्तिष्क-स्कैन दिखाते हैं कि दिन भर में, यहाँ तक कि नींद में भी, मस्तिष्क के लगभग सभी हिस्से किसी न किसी समय सक्रिय होते हैं। मस्तिष्क शरीर की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा खर्च करता है—प्रकृति 90% निष्क्रिय अंग नहीं पालती।
क्या लोग 'बाएँ-दिमाग़' या 'दाएँ-दिमाग़' वाले होते हैं?
यह विचार कि तार्किक लोग 'बाएँ-दिमाग़' और रचनात्मक लोग 'दाएँ-दिमाग़' वाले होते हैं, एक अति-सरलीकरण है। यह सच है कि कुछ कार्य एक गोलार्ध में अधिक केंद्रित होते हैं, पर लगभग हर जटिल कार्य में दोनों गोलार्ध मिलकर काम करते हैं। किसी का समग्र व्यक्तित्व एक तरफ़ के दिमाग़ से तय नहीं होता।
क्या 'लर्निंग स्टाइल' के अनुसार पढ़ाने से फ़ायदा होता है?
यह लोकप्रिय मान्यता कि कुछ लोग 'दृश्य' और कुछ 'श्रवण' शिक्षार्थी होते हैं, और उसी अनुसार पढ़ाने से वे बेहतर सीखते हैं—प्रयोगों में टिकती नहीं। शोध बताते हैं कि सामग्री की प्रकृति के अनुसार उपयुक्त तरीक़ा चुनना, व्यक्ति की कथित 'शैली' से कहीं अधिक मायने रखता है। हर किसी को सक्रिय और विविध तरीक़ों से लाभ होता है।
क्या शास्त्रीय संगीत सुनने से बच्चे होशियार बनते हैं?
तथाकथित 'मोज़ार्ट प्रभाव'—यानी संगीत सुनने मात्र से बुद्धि बढ़ना—को मूल अध्ययन से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और बाद में यह विश्वसनीय रूप से दोहराया नहीं जा सका। संगीत सीखना और अभ्यास करना ज़रूर लाभकारी हो सकता है, पर सिर्फ़ पृष्ठभूमि में संगीत बजाना IQ नहीं बढ़ाता। यह एक आकर्षक पर भ्रामक दावा है।