- प्लेटो ने आत्मा को तीन हिस्सों में बाँटा, जिसमें एक विवेकशील (तर्कशील) हिस्सा इच्छा और भावना पर शासन करता है। उनके लिए तर्क मनुष्य की सर्वोच्च शक्ति और सत्य तक पहुँचने का मार्ग था।
- अरस्तू ने आत्मा की शक्तियों का वर्गीकरण किया और सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रज्ञा (फ्रोनेसिस) से अलग बताया। अच्छी तरह तर्क करने की क्षमता को उन्होंने मानव श्रेष्ठता का केंद्र माना।
- भारत, चीन और कई प्राचीन संस्कृतियों में बुद्धि को अक्सर प्रज्ञा, स्मृति और सही निर्णय से जोड़ा जाता था, न कि किसी एक मापने योग्य संख्या से। मन को एक अंक देने का विचार बहुत बाद में आया।
- इन्होंने बुद्धि को तर्क और प्रज्ञा के रूप में परिभाषित किया — जो किसी परीक्षा अंक से कहीं समृद्ध धारणा है। आधुनिक सिद्धांत बार-बार इसी व्यापक दृष्टि की ओर लौटते हैं।
प्लेटो ने मन को कैसे देखा?
प्लेटो ने आत्मा को तीन हिस्सों में बाँटा, जिसमें एक विवेकशील (तर्कशील) हिस्सा इच्छा और भावना पर शासन करता है। उनके लिए तर्क मनुष्य की सर्वोच्च शक्ति और सत्य तक पहुँचने का मार्ग था।
अरस्तू ने इसमें क्या जोड़ा?
अरस्तू ने आत्मा की शक्तियों का वर्गीकरण किया और सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रज्ञा (फ्रोनेसिस) से अलग बताया। अच्छी तरह तर्क करने की क्षमता को उन्होंने मानव श्रेष्ठता का केंद्र माना।
क्या अन्य आरंभिक दृष्टिकोण भी थे?
भारत, चीन और कई प्राचीन संस्कृतियों में बुद्धि को अक्सर प्रज्ञा, स्मृति और सही निर्णय से जोड़ा जाता था, न कि किसी एक मापने योग्य संख्या से। मन को एक अंक देने का विचार बहुत बाद में आया।
ये विचार आज भी क्यों मायने रखते हैं?
इन्होंने बुद्धि को तर्क और प्रज्ञा के रूप में परिभाषित किया — जो किसी परीक्षा अंक से कहीं समृद्ध धारणा है। आधुनिक सिद्धांत बार-बार इसी व्यापक दृष्टि की ओर लौटते हैं।