- 1905 में फ्रांसीसी सरकार ने अल्फ्रेड बिने और थियोडोर साइमन को ऐसा तरीका खोजने को कहा जिससे उन बच्चों की पहचान हो सके जिन्हें नियमित कक्षाओं में संघर्ष करना पड़ता था। उद्देश्य उन्हें लेबल करना नहीं, बल्कि उन्हें उपयुक्त शैक्षिक सहायता देना था।
- इस स्केल में बढ़ती कठिनाई वाले व्यावहारिक कार्य थे — स्मृति, ध्यान और तर्क से जुड़े। बच्चा जिस स्तर तक कार्य हल कर पाता, वह दर्शाता था कि उसका प्रदर्शन उसकी आयु के अनुरूप है या नहीं।
- मानसिक आयु यह बताती है कि बच्चे का प्रदर्शन किस आयु-समूह के औसत के बराबर है। उदाहरण के लिए, यदि कोई 7 वर्षीय बच्चा वे कार्य हल कर लेता है जो आमतौर पर 9 साल के बच्चे करते हैं, तो उसकी मानसिक आयु 9 मानी जाती।
- बिने ने स्पष्ट किया कि उनका स्कोर एक व्यावहारिक उपकरण है, न कि किसी स्थिर, जन्मजात बुद्धि का माप। उन्हें डर था कि इसका दुरुपयोग बच्चों पर स्थायी ठप्पा लगाने के लिए हो सकता है — एक चिंता जो बाद में सही साबित हुई।
बिने ने अपना परीक्षण क्यों बनाया?
1905 में फ्रांसीसी सरकार ने अल्फ्रेड बिने और थियोडोर साइमन को ऐसा तरीका खोजने को कहा जिससे उन बच्चों की पहचान हो सके जिन्हें नियमित कक्षाओं में संघर्ष करना पड़ता था। उद्देश्य उन्हें लेबल करना नहीं, बल्कि उन्हें उपयुक्त शैक्षिक सहायता देना था।
बिने-साइमन स्केल कैसे काम करता था?
इस स्केल में बढ़ती कठिनाई वाले व्यावहारिक कार्य थे — स्मृति, ध्यान और तर्क से जुड़े। बच्चा जिस स्तर तक कार्य हल कर पाता, वह दर्शाता था कि उसका प्रदर्शन उसकी आयु के अनुरूप है या नहीं।
'मानसिक आयु' का क्या अर्थ है?
मानसिक आयु यह बताती है कि बच्चे का प्रदर्शन किस आयु-समूह के औसत के बराबर है। उदाहरण के लिए, यदि कोई 7 वर्षीय बच्चा वे कार्य हल कर लेता है जो आमतौर पर 9 साल के बच्चे करते हैं, तो उसकी मानसिक आयु 9 मानी जाती।
बिने ने अपने परीक्षण को लेकर क्या चेतावनी दी?
बिने ने स्पष्ट किया कि उनका स्कोर एक व्यावहारिक उपकरण है, न कि किसी स्थिर, जन्मजात बुद्धि का माप। उन्हें डर था कि इसका दुरुपयोग बच्चों पर स्थायी ठप्पा लगाने के लिए हो सकता है — एक चिंता जो बाद में सही साबित हुई।