- शोधकर्ता जेम्स फ्लिन ने दिखाया कि 20वीं सदी के अधिकांश दशकों में कई देशों में औसत आईक्यू स्कोर हर दशक में लगातार बढ़ते रहे। इसी निरंतर वृद्धि को उनके नाम पर फ्लिन प्रभाव कहा जाता है।
- इसके संभावित कारणों में बेहतर पोषण और स्वास्थ्य, अधिक एवं बेहतर स्कूली शिक्षा, छोटे परिवार, तथा अमूर्त एवं तार्किक सोच पर ज़ोर देने वाला आधुनिक वातावरण शामिल हैं। संभवतः यह वृद्धि जन्मजात बुद्धि के बजाय इन्हीं परिस्थितियों को दर्शाती है।
- हाल के दशकों में कुछ विकसित देशों — जैसे नॉर्वे और कुछ अन्य — में औसत स्कोर स्थिर होते या थोड़ा गिरते देखे गए हैं। इस संभावित प्रवृत्ति को 'उलटा फ्लिन प्रभाव' कहा जाता है, हालाँकि इसके कारणों पर अभी बहस जारी है।
- यह दर्शाता है कि आईक्यू स्कोर पर वातावरण का गहरा असर पड़ता है और ये पीढ़ियों के बीच सीधे तुलनीय नहीं होते। यही कारण है कि परीक्षणों को समय-समय पर पुनः मानकीकृत करना पड़ता है।
फ्लिन प्रभाव क्या है?
शोधकर्ता जेम्स फ्लिन ने दिखाया कि 20वीं सदी के अधिकांश दशकों में कई देशों में औसत आईक्यू स्कोर हर दशक में लगातार बढ़ते रहे। इसी निरंतर वृद्धि को उनके नाम पर फ्लिन प्रभाव कहा जाता है।
स्कोर क्यों बढ़े?
इसके संभावित कारणों में बेहतर पोषण और स्वास्थ्य, अधिक एवं बेहतर स्कूली शिक्षा, छोटे परिवार, तथा अमूर्त एवं तार्किक सोच पर ज़ोर देने वाला आधुनिक वातावरण शामिल हैं। संभवतः यह वृद्धि जन्मजात बुद्धि के बजाय इन्हीं परिस्थितियों को दर्शाती है।
उलटा फ्लिन प्रभाव क्या है?
हाल के दशकों में कुछ विकसित देशों — जैसे नॉर्वे और कुछ अन्य — में औसत स्कोर स्थिर होते या थोड़ा गिरते देखे गए हैं। इस संभावित प्रवृत्ति को 'उलटा फ्लिन प्रभाव' कहा जाता है, हालाँकि इसके कारणों पर अभी बहस जारी है।
फ्लिन प्रभाव हमें क्या सिखाता है?
यह दर्शाता है कि आईक्यू स्कोर पर वातावरण का गहरा असर पड़ता है और ये पीढ़ियों के बीच सीधे तुलनीय नहीं होते। यही कारण है कि परीक्षणों को समय-समय पर पुनः मानकीकृत करना पड़ता है।